एक गुजरती शाम ने
और समझदार कर दिया
किसी के जाने की पीड़ा का
आजीवन हिस्सेदार कर दिया
आंखों से जो पिघला
वो सीने में भर दिया
अब आती जाती लहरें हैं
यादों का समंदर कर दिया
और समझदार कर दिया
किसी के जाने की पीड़ा का
आजीवन हिस्सेदार कर दिया
आंखों से जो पिघला
वो सीने में भर दिया
अब आती जाती लहरें हैं
यादों का समंदर कर दिया
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