उनके पत्थरों को फूल कह दूं तो चलेगा
हर कत्ल को उनकी भूल कह दूं तो चलेगा
एक लकीर है बारीक
वो मिटा देना चाहते हैं
तलवारों के ज़ोर पे
खुद जैसा बना देना चाहते हैं
गुमराह रहे हैं उनको
गुमराह करेगा कौन
खून की जिनको प्यास रही
तो जाम भरेगा कौन
जब तर्क से नहीं होगा
तो गाली देंगे
गाली देकर थकेंगे
तो मारेंगे
मार कर भी हारेंगे
तो आवाज़ दबाएंगे
हर बार ऐसे ही आते है,
हर बार ऐसे ही आयेंगे
उनको डर आपसे नहीं
आपके सनातन तत्व से है
जो सर्वदा जयते रहा
उसी भारत के सत्य से है
घर फूंक मेरा हाथों से
गुलाब लेकर आए हैं
शहर जला के देखो मेरा
फूल चढ़ाने आए हैं
जितनी आग लगाओगे
खुद जलते ही जाओगे
जब आग तुम्हारी ठंडी होगी
बस राख तुम्हारा हासिल होगा
पहले भी जलाया है
कल भी जलाएंगे
आग है जिनकी फितरत
वो चिंगारी लेकर आएंगे
गांधी की फोटो लाए हैं
वो देश जलाने आए हैं
तेरी मासूमियत से जहां रूबरू ना था
ये और बात है कि तूने पर्दा उठा दिया
गांधी की फोटो लाए हैं
ये खून बहाने आए हैं
ख़तरनाक होती है
एक डरी हुई भीड़
और उससे भी ख़तरनाक होती है
डरी हुई भीड़ से डरी हुई
एक बड़ी भीड़
और सबसे ख़तरनाक होती है
अपने उस डर मिटा देने वाली भीड़
क्यूंकि उस डर की कीमत
अदा करती है
एक तीसरी गुमनाम भीड़
हर कत्ल को उनकी भूल कह दूं तो चलेगा
एक लकीर है बारीक
वो मिटा देना चाहते हैं
तलवारों के ज़ोर पे
खुद जैसा बना देना चाहते हैं
गुमराह रहे हैं उनको
गुमराह करेगा कौन
खून की जिनको प्यास रही
तो जाम भरेगा कौन
जब तर्क से नहीं होगा
तो गाली देंगे
गाली देकर थकेंगे
तो मारेंगे
मार कर भी हारेंगे
तो आवाज़ दबाएंगे
हर बार ऐसे ही आते है,
हर बार ऐसे ही आयेंगे
उनको डर आपसे नहीं
आपके सनातन तत्व से है
जो सर्वदा जयते रहा
उसी भारत के सत्य से है
घर फूंक मेरा हाथों से
गुलाब लेकर आए हैं
शहर जला के देखो मेरा
फूल चढ़ाने आए हैं
जितनी आग लगाओगे
खुद जलते ही जाओगे
जब आग तुम्हारी ठंडी होगी
बस राख तुम्हारा हासिल होगा
पहले भी जलाया है
कल भी जलाएंगे
आग है जिनकी फितरत
वो चिंगारी लेकर आएंगे
गांधी की फोटो लाए हैं
वो देश जलाने आए हैं
तेरी मासूमियत से जहां रूबरू ना था
ये और बात है कि तूने पर्दा उठा दिया
गांधी की फोटो लाए हैं
ये खून बहाने आए हैं
ख़तरनाक होती है
एक डरी हुई भीड़
और उससे भी ख़तरनाक होती है
डरी हुई भीड़ से डरी हुई
एक बड़ी भीड़
और सबसे ख़तरनाक होती है
अपने उस डर मिटा देने वाली भीड़
क्यूंकि उस डर की कीमत
अदा करती है
एक तीसरी गुमनाम भीड़
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