नाज़ियों की भीड़ है और
शक्ल कुछ बदल गई
मुख्तसर सी बात पे
डर से देखो हिल गई
बुतशिकन जमा हुए
और आग चारो ओर है
हम सही हैं सब गलत
हर तरफ ये शोर है
झूठ के पहाड़ पर
जला रहे मशाल हैं
बस्तियां भी चुप सी हैं
इस देश का कमाल है
शक्ल कुछ बदल गई
मुख्तसर सी बात पे
डर से देखो हिल गई
बुतशिकन जमा हुए
और आग चारो ओर है
हम सही हैं सब गलत
हर तरफ ये शोर है
झूठ के पहाड़ पर
जला रहे मशाल हैं
बस्तियां भी चुप सी हैं
इस देश का कमाल है
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