Showing posts with label पहचान. Show all posts
Showing posts with label पहचान. Show all posts

Friday, December 30, 2011

दिल्ली में....




नहीं रहा अब मैं भी, अंजान दिल्ली में
बनने लगी है थोड़ी पहचान दिल्ली में,

पापा के पैसौं से नहीं, खुद की कमाई से सही
अट्टालिकाओं के बीच,
ले लिया है किराए का मकान दिल्ली में,

पहले की तरह भीड़ से भरी सड़कें
नहीं लगती हैं मुझको सुनसान दिल्ली में,

 अब मुझको भी देख के कुछ चेहरों पर
आ जाती है मुस्कान दिल्ली में,

गले में कंपनी का पट्टा
दिलाता है अलग आत्मसम्मान दिल्ली में,

 और हां ऑफिस में ही हम मानते हैं
होली,दिवाली या रमज़ान दिल्ली में,

होती होगी बंदी सरकारी ऐलानों में कहीं
दो अक्टूबर को तो हर ओर छलकते हैं यहां जाम दिल्ली में,

 दशहरे में ही जहां सच के लिए एक बार जगता था
बात बात पे जी उठता है अब वो रामलीला मैदान दिल्ली में,

 ज़हनी गुलामी के बीच लालक़िले से
खूब होता है आज़ादी का ऐलान दिल्ली में,

जनता के सेवक संसद में आ के
बन जाते हैं मालिकान दिल्ली में,

लेकिन मैं तो खुश हूं
क्योंकि नहीं रहा मैं भी अंजान दिल्ली में

                  - रवि मिश्रा