Thursday, January 23, 2014

कुछ सपने .....जो टूटते नहीं



 कोई तो बात होगी
कुछ सपनों में
जो मिटते नहीं
जो टूटते नहीं
जिनको मैं नींद में भी
सोते हुए
या दिन में भी
खुली आंखों से...
देखा करता था
देखा करता हूं
कोई तो बात होगी
कुछ सपनों में
जिनको जीने के लिए
मैं हर रोज मरता हूं
गिरता हूं,उठता हूं
संभलता हूं,
फिर चल देता हूं
कोई तो बात होगी
कुछ सपनों में
जो मेरा पीछा नहीं छोड़ते
मैं छुड़ाना भी नहीं चाहता
हथेली में भींच के
बंद करना चाहता हूं
दूर जाना भी नहीं चाहता
मालूम नहीं सच होने पर
उनकी शक्ल क्या होती है
ऐसी होती है क्या, जैसी दिखती है
वैसी दिखती है क्या, जैसा देखता हूं
चलो देखते है उनके हकीकत बनने तक
आखिर कोई तो बात होगी
कुछ सपनों में......

Thursday, December 5, 2013

उम्मीदों का जनप्रतिनिधी

एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
जो जन के जीवन से जुड़ा हो
जो वचनों से नहीं कर्म से पूरा हो
वो जो राष्ट्र के उत्थान की सोचे
वो जो बेघर के मकान की सोचे
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो...
 
ऐसा जो मुकरे नहीं वादों से
ऐसा जो अटल हो अपने हो इरादों से
जो  करे बात हमारी तुम्हारी
जिसे ने लगे भ्रष्टाचार की बीमारी
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो...
 
जो जुड़ा हो सच के जहान से
जिसकी सोच मिलती हो तरक्की के आसमान से
जिसके हाथ हर मजलूम के लिए सहारा हों
जो हर डूबती उम्मीद का किनारा हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो......
 
वो जो बदले तस्वीर समाज की
वो जो बने प्रतिछाया जनता के राज की
जो साहस में हिमालय हो
जिसका हृदय करूणा का देवालय हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
 
जिसके पदचिन्हों पर चलने को उबले युवा रक्त
जिसके एक एक वचन का हर मन हो आसक्त
कर्म से श्रेष्ठ जिसके लिए कोई धर्म न हो
जन सेवा से पृथक जीवन का कोई मर्म न हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
 
- रवि मिश्रा ( 06.12.2013)
 
 

Sunday, October 27, 2013

ले चल अपना तीर..


ओ रे मांझी
ले चल अपना तीर
जग के घाट पर
बइठल-बइठल
सूखे अंतर नीर

ओ रे मांझी
ले चल अपना तीर...


ना कोई संगी
ना कोई साथी
अब ना रहल कोई मीत
सांस से जीवन
छूटत जाए
जीवन से छूटे धीर

ओ रे मांझी
ले चल अपना तीर...

देह के भार बा
मोह के भार ब
बाटे माया सघन
बोझ सहल ना जाए अब त
माटी भएल शरीर

ओ रे मांझी
ले चल अपना तीर...

                - रवि मिश्रा( 27.10.13)



Sunday, October 13, 2013

मनवा चल तू धीरे-धीरे


घाटे-घाटे 
तीरे-तीरे

मनवा चल तू
धीरे-धीरे...

सहर-गांव में
बन फकीरे

मनवा चल तू 
धीरे-धीरे...

आस रहे
विस्वास रहे

पग -पग पर
उल्लास रहे

बाजे झाल
ताल खंजीरे

 
मनवा चल तू
 
धीरे-धीरे....

भोर भोर में
पोर पोर में

राग रंग में
अंग अंग में

मंद मंद
कुछ मधुर बहे रे

मनवा चल तू 
धीरे-धीरे...

ना सवाल बा
ना जवाब बा

बस खयाल बा
उ कमाल बा

अंगना दुआर आउर
घर के सांझ रे

मनवा चल तू
धीरे-धीरे


                                     -
रवि मिश्रा



न आएल अंजोरिया

बरस-बरस कर दिन बीते
बीते न रात अनहरिया
झुरियाएल अब आंख के पपनी
अमावस के बाद ना आएल अंजोरिया

हार के बाद जीत होएला
प्रेम से ही त प्रीत होएला
हाथ से हाथ बढ़ाव त
जग में हर कोई मीत होएला
कहां बा अइसन संसार
जहां मिले अइसन नीक नजरिया
अमावस के बाद न आएल अंजोरिया

जबतक कोनों आस ना रले
तबतक कंठ में पियास न रले
ना रले कोनों अभिलाषा
निष्प्राण मन में विश्वास न रले
उम्मीद कोनों ना टूटे जहां
कहां मिली हमरा उ दुअरिया
अमावस के बाद न आएला अंजोरिया

 कह द जाके कोई स्वप्न न देखे
टूट जाए अइसन उम्मीद न रखे
देह के मरण त एकबार ही होला
मन के मृत्यु न दुनिया देखे
जुग जुग से बंद बा मन इ कोठरिया
अमावस के बाद न आएला अंजोरिया

                          - रवि मिश्रा( 13.10.2013)










Wednesday, October 2, 2013

फिर से तू आजा....




फिर से सपना कोई दिखा द
फिर से प्यार जता द
सूखल-सूखल डाली पर फिर से
प्रेम के फूल खिला द


फिर आव एक बार सही
कुछ आपन तू मन कह
कुछ हम मन के बात कहीं
फिर से तू जीवन महका द
फिर से हमरा के बहका द
मन के अंगना में फिर से
सुख के एगो दीप जला द


दूर सांझ के बेला देख
भारी-भारी मन हो जाए
अंत के ओर बढ़े सबकुछ
रात के जइसन जीवन हो जाए
फिर से तू चंदा बन के
अंजोरिया में हमरा के नहा द
सांस में जीवन बा हमरा
मन के इ एहसास दिला द

                    - रवि मिश्रा (02.10.2013)






Wednesday, September 18, 2013

मशाल जलत रहे भाई

अभी त रात बाकी बा
अभी मशाल जलत रहे भाई
अभी सफर पूरा कहां
रुके न गोर चलत रहे भाई
 
आस छलनी,विश्वास छलनी
काठ से कठोर भाग्य
आउर मानस के प्रयास छलनी
अंत तक जे माने न हार
विजय ओकर ही सतत रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

 जे चलेला उहे गिरेला
जे लड़ेला उहे हारेला
घाट पर बईठल मुसाफिर
पार ना हो पाएला
धार से लड़के ही नाव बढ़त रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

 मन के भीतर जहां उजाला
बाहर अंधेरा कहां रहेला
आस पर जेकर बा उडान
उहे उठल बा, युग प्रमाण
त अंजोर आसा के फइलत रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

                                        - रवि मिश्रा (18.09.2013)