बरस-बरस कर
दिन बीते
बीते न रात
अनहरिया
झुरियाएल अब
आंख के पपनी
अमावस के बाद
ना आएल अंजोरिया
हार के बाद
जीत होएला
प्रेम से ही
त प्रीत होएला
हाथ से हाथ
बढ़ाव त
जग में हर
कोई मीत होएला
कहां बा अइसन
संसार
जहां मिले
अइसन नीक नजरिया
अमावस के बाद
न आएल अंजोरिया
जबतक कोनों
आस ना रले
तबतक कंठ में
पियास न रले
ना रले कोनों
अभिलाषा
निष्प्राण मन
में विश्वास न रले
उम्मीद कोनों
ना टूटे जहां
कहां मिली
हमरा उ दुअरिया
अमावस के बाद
न आएला अंजोरिया
टूट जाए अइसन
उम्मीद न रखे
देह के मरण त
एकबार ही होला
मन के मृत्यु
न दुनिया देखे
जुग जुग से
बंद बा मन इ कोठरिया
अमावस के बाद
न आएला अंजोरिया
- रवि मिश्रा( 13.10.2013)
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