Sunday, October 13, 2013

न आएल अंजोरिया

बरस-बरस कर दिन बीते
बीते न रात अनहरिया
झुरियाएल अब आंख के पपनी
अमावस के बाद ना आएल अंजोरिया

हार के बाद जीत होएला
प्रेम से ही त प्रीत होएला
हाथ से हाथ बढ़ाव त
जग में हर कोई मीत होएला
कहां बा अइसन संसार
जहां मिले अइसन नीक नजरिया
अमावस के बाद न आएल अंजोरिया

जबतक कोनों आस ना रले
तबतक कंठ में पियास न रले
ना रले कोनों अभिलाषा
निष्प्राण मन में विश्वास न रले
उम्मीद कोनों ना टूटे जहां
कहां मिली हमरा उ दुअरिया
अमावस के बाद न आएला अंजोरिया

 कह द जाके कोई स्वप्न न देखे
टूट जाए अइसन उम्मीद न रखे
देह के मरण त एकबार ही होला
मन के मृत्यु न दुनिया देखे
जुग जुग से बंद बा मन इ कोठरिया
अमावस के बाद न आएला अंजोरिया

                          - रवि मिश्रा( 13.10.2013)










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