घाटे-घाटे
तीरे-तीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
सहर-गांव में
बन फकीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
आस रहे
विस्वास रहे
पग -पग पर
उल्लास रहे
बाजे झाल
ताल खंजीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे....
भोर भोर में
पोर पोर में
राग रंग में
अंग अंग में
मंद मंद
कुछ मधुर बहे रे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
ना सवाल बा
ना जवाब बा
बस खयाल बा
उ कमाल बा
अंगना दुआर आउर
घर के सांझ रे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे
- रवि मिश्रा
तीरे-तीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
सहर-गांव में
बन फकीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
आस रहे
विस्वास रहे
पग -पग पर
उल्लास रहे
बाजे झाल
ताल खंजीरे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे....
भोर भोर में
पोर पोर में
राग रंग में
अंग अंग में
मंद मंद
कुछ मधुर बहे रे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे...
ना सवाल बा
ना जवाब बा
बस खयाल बा
उ कमाल बा
अंगना दुआर आउर
घर के सांझ रे
मनवा चल तू
धीरे-धीरे
- रवि मिश्रा
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