Sunday, October 13, 2013

मनवा चल तू धीरे-धीरे


घाटे-घाटे 
तीरे-तीरे

मनवा चल तू
धीरे-धीरे...

सहर-गांव में
बन फकीरे

मनवा चल तू 
धीरे-धीरे...

आस रहे
विस्वास रहे

पग -पग पर
उल्लास रहे

बाजे झाल
ताल खंजीरे

 
मनवा चल तू
 
धीरे-धीरे....

भोर भोर में
पोर पोर में

राग रंग में
अंग अंग में

मंद मंद
कुछ मधुर बहे रे

मनवा चल तू 
धीरे-धीरे...

ना सवाल बा
ना जवाब बा

बस खयाल बा
उ कमाल बा

अंगना दुआर आउर
घर के सांझ रे

मनवा चल तू
धीरे-धीरे


                                     -
रवि मिश्रा



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