Wednesday, September 18, 2013

मशाल जलत रहे भाई

अभी त रात बाकी बा
अभी मशाल जलत रहे भाई
अभी सफर पूरा कहां
रुके न गोर चलत रहे भाई
 
आस छलनी,विश्वास छलनी
काठ से कठोर भाग्य
आउर मानस के प्रयास छलनी
अंत तक जे माने न हार
विजय ओकर ही सतत रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

 जे चलेला उहे गिरेला
जे लड़ेला उहे हारेला
घाट पर बईठल मुसाफिर
पार ना हो पाएला
धार से लड़के ही नाव बढ़त रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

 मन के भीतर जहां उजाला
बाहर अंधेरा कहां रहेला
आस पर जेकर बा उडान
उहे उठल बा, युग प्रमाण
त अंजोर आसा के फइलत रहे भाई
अभी मशाल जलत रहे भाई

                                        - रवि मिश्रा (18.09.2013)



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