Tuesday, December 3, 2019

सबसे क्रूर

टूटे हौसलों के बाद
उठा पहला कदम
सबसे क्रूर होता है

छूटे जीवन के बाद
जीने का पहला स्वप्न
एक फितूर होता है

बहुत रोने के बाद
जो चुप हो जाता है
वो सबसे मजबूर होता है

खारा

जो ओझल हुई है अभी-अभी
तैरती हुई एक कहानी है
भरा तो है पर खारा भी है
न जाने कितनी आंखों का पानी है

समझदार कर दिया

एक गुजरती शाम ने
और समझदार कर दिया
किसी के जाने की पीड़ा का
आजीवन हिस्सेदार कर दिया

आंखों से जो पिघला
वो सीने में भर दिया
अब आती जाती लहरें हैं
यादों का समंदर कर दिया

उस पार न जाने क्या है

जो जाता है वो आता नहीं
उस पार न जाने क्या है

जिसका था संसार यहां पर
वो याद उसे आता नहीं
उस पार न जाने क्या है

सागर सा संदेश मेरा
क्या कोई उसे पहुंचाता नहीं
उस पार न जाने क्या है

सांझ हुई अब बैठ किनारे.....
कोई अपना नहीं लौटा है
उसपर न जाने क्या है

दरिया

सुना है जिंदगीं वहां फिर रफ्तार में है
एक हादसे के बाद दूसरे के इंतजार में है
आंखो से बहता रहे वही आंसू क्यों है
उस दरिया का भी कोई तो नाम हो
जो भीतर है ,जो दिल के ख़ार में है

जाना कहां है

जाना कहां है कहीं नहीं
मिलेंगे हम हर बार यहीं
जब हटेंगे अना के पर्दे
मैं भी सही, तुम भी सही
( अना - Ego)

सबसे घृणित

सबसे घृणित वही है
जो न्याय नहीं है पर
न्याय सा है

सबसे  डरावना वही है
जो जानवर नहीं है पर
जानवर सा है

सबसे बड़ा भय वही है
जो मृत्यु नहीं है पर
मृत्यु सा है

सबसे अंधा वही है
जो देखता है मगर
दृष्टि नहीं है

सबसे कठोर वही है
जो कोमल है पर
भाव नहीं है

सबसे पीछे वही है
जो दौड़ता है मगर
दौड़ में नहीं है

सबसे पीड़ित वही है
जिसे पीड़ा है मगर
कहता नहीं है

सबसे निर्बल वही है
सबसे लड़ता है मगर
खुद से लड़ता नहीं है।