Thursday, June 30, 2016

कश्मीर उसका घर है

है मगर आता नहीं नजर है
सुना है कश्मीर उसका घर है

कहां हैं वो दीवारें
वो खिड़कियां
चिनारों पर अब
ये किसका असर है
सुना है कश्मीर उसका घर है

आँखों में झेलम -चिनाब भरा है
बहता है कई बार
छूटे पहाड़ जो माली थे
सूरज तो है कहां सहर है
सुना है कश्मीर उसका घर है

है कोई खुदा तो
है कोई रहनुमा तो
कोई निजाम यहां अगर है
वो पूछती है उनसे
अरसा हुआ रोते
क्या आंसुओं में बाकी कोई असर है
सुना है कश्मीर उसका घर है

हर बार जो लौटती है
मिट्टी की खुशबू ओढ़ती है
छूटे खेल खिलौने कहां हैं
अपने घर के वो कोने कहां हैं
आँखों मे रहता मकान सा है
वो कोई छूटा आसमान सा है
वो आसमान उसका किधर है
सुना है कश्मीर उसका घर है
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