Monday, February 25, 2019

प्यासी भीड़ की सरकार

फटे लिबास
और फटी जेब
फटी आंखों की
सजल उम्मीदें
सिंहासन को
देख रहा थीं
धूल उड़ाते
 पवनयान
क्या करते
 सपने साकार
उसी जेब का
वही पसीना
खूब लुटाते
बारम्बार
फिर देखी
एक प्यासी भीड़
और रूबरू थी
उसकी सरकार.

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