फटे लिबास
और फटी जेब
फटी आंखों की
सजल उम्मीदें
सिंहासन को
देख रहा थीं
धूल उड़ाते
पवनयान
क्या करते
सपने साकार
उसी जेब का
वही पसीना
खूब लुटाते
बारम्बार
फिर देखी
एक प्यासी भीड़
और रूबरू थी
उसकी सरकार.
और फटी जेब
फटी आंखों की
सजल उम्मीदें
सिंहासन को
देख रहा थीं
धूल उड़ाते
पवनयान
क्या करते
सपने साकार
उसी जेब का
वही पसीना
खूब लुटाते
बारम्बार
फिर देखी
एक प्यासी भीड़
और रूबरू थी
उसकी सरकार.
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