कुछ एक शब्द शायद छिटक के
तुम तक पहुंच भी जाएेंगे मगर
जताना कि उन्हें समझा ही नहीं
अब जाके धुंधली हुई है लकीरें
दिखाना कि वो कभी थीं ही नहीं
कुछ एक टुकड़े साझा सपनों के
जो पांव में चुभ जाएें मगर
जताना कि कुछ हुआ ही नहीं
मेरे घर से निकली हवाएं जो टकराएं
बताना कि किसी ने तुमको छुआ ही नहीं
जरूरी नहीं कि सबसे हम विदा ही कहें
कुछ भरम रहे दरम्या मगर
बताना कि कोई रिश्ता कहां था
जो कभी किसी ने पूछा अगर
समझाना कोई वास्ता कहां था
फिर जो मन की कोठरी में
साथ पाओ तो अगर
छुपाना कि कुछ सोचा कहां था
हृदय को तब छलोगे मगर
इस छल से अब बचना कहां था.
- रवि मिश्रा
तुम तक पहुंच भी जाएेंगे मगर
जताना कि उन्हें समझा ही नहीं
अब जाके धुंधली हुई है लकीरें
दिखाना कि वो कभी थीं ही नहीं
कुछ एक टुकड़े साझा सपनों के
जो पांव में चुभ जाएें मगर
जताना कि कुछ हुआ ही नहीं
मेरे घर से निकली हवाएं जो टकराएं
बताना कि किसी ने तुमको छुआ ही नहीं
जरूरी नहीं कि सबसे हम विदा ही कहें
कुछ भरम रहे दरम्या मगर
बताना कि कोई रिश्ता कहां था
जो कभी किसी ने पूछा अगर
समझाना कोई वास्ता कहां था
फिर जो मन की कोठरी में
साथ पाओ तो अगर
छुपाना कि कुछ सोचा कहां था
हृदय को तब छलोगे मगर
इस छल से अब बचना कहां था.
- रवि मिश्रा
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