Friday, March 22, 2019

सबकुछ वतन

है वतन अपना तो सबकुछ
सबकुछ है तुझपर ही निसार
सौ बार जन्मू इसी धरा पर
सौ बार मिले मां तेरा ही प्यार

है कफ़न मेरा मुकद्दर
तेरी खुशी के वास्ते
हमने चुने थे ऐ वतन
तेरे लिए ये रास्ते
मर के भी जिन्दा हैं हम
हर साँस में वतन के
फूल नहीं फौलाद थे
रक्षक थे इस चमन के

कुछ याद आए ना सही
नस्लों ये याद रखना
कोई भी हो कुर्बानी मगर
ये मुल्क आबाद रखना

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