Monday, March 19, 2018

लेफ्ट या राइट


थोड़ा बाएं मुड़ जाने का मतलब लेफ्ट नहीं होता है
 कुछ दाएं झुक जाने का मतलब राइट नहीं होता है
कुछ बहस वहस होती रहे
पर हर शोर का मतलब फाइट नहीं होता है

तब जब वेदों पर
 टीका की थी कभी उपनिषदों ने
 तब जब ब्राह्मण चाणक्य
 सत्ता से भिड़ा जनपदों में
तब जब चरक मुनि ने
 शूद्र वर्ण अपनाया
 तब जब शंकर ने कभी
 अद्वैत मार्ग दिखलाया
ये सब तब बाईं तरफ झुके थे
 तुम देखो ये कौन थे
ये राइट थे या लेफ्ट थे

 विश्वामित्र ने तब जब
 ब्राह्मण बनने की ठानी
 रैदास ने धर्म का मार्ग चुना
तो किसी ने दी गुरुबानी
और गांधी जो राम नाम रटते थे
 और नरेंद्र जो हिन्दू हूँ
गर्व से कहते थे
और अकबर जिसने
दिया दीन का नारा
 और दयानंद जिन्होंने
प्रस्तर पूजन से किया किनारा
और जो एक ख़िलाफ़त की खातिर
 सब निकले सड़कों पर
तब हां
 तब भी वो कुछ राइट की ओर मुड़े थे
अब तुम देखो
 वो राइट थे या लेफ्ट थे

वो बुद्ध थे
जो थोड़ा लेफ्ट मुड़े
 और मध्यम मार्ग को खोजा
वो मुहम्मद थे
जो थोड़ा राइट मुड़े
और नए विचार को जोड़ा
 वो एकलव्य था जो राइट मुड़ा
पर दक्षिण की दीवारों को तोड़ा
 वो शून्यदशमलवगणितज्योतिष
सबकुछ दक्षिण मार्ग से आये
 वो कबीर , मीरारहीमनानकरसखान
क्यों भक्ति काल के कहलाए
ये सब अपने अपने मार्ग गए थे
अब तुम देखो ये राइट थे या लेफ्ट थे... –

 रवि मिश्रा( 26.9.2017)


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