Saturday, April 7, 2018

किसान

खेतों से क्यूं उग आई हैं ये लाशें
चलों इन मुर्दों को कुछ और तराशें...

कुदरत का इंसाफ या कोई कहर हैं
रात सी काली हर रोज सहर है...

निजाम ने कोई फिर ऐलान किया है
दहका (किसान)की चुप्पी का इंतजाम किया है...

जिसकी औलादें जवानी में बूढी हो जाती हैं
जिनको मौत तय वक्त से पहले आती है...

जिसके पसीनेे से सींचा अनाज तू खाता है
ऐ मुल्क तुझे मरता वो किसान नजर आता है...

No comments:

Post a Comment