मौसम मन के कहां ले उड़े
याद के केतना गाँठ खुले
तन बंधिक मन पंछी अलबेला
कहां - कहां ना इहो उडे़ला
हवा -लहर पर बा सवार
घूम आवे इ सागर पार
याद के केतना गाँठ खुले
तन बंधिक मन पंछी अलबेला
कहां - कहां ना इहो उडे़ला
हवा -लहर पर बा सवार
घूम आवे इ सागर पार
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