थोड़ा बाएं मुड़ जाने का मतलब लेफ्ट नहीं होता है
कुछ दाएं झुक जाने का मतलब राइट नहीं होता है
कुछ बहस वहस होती रहे
पर हर शोर का मतलब फाइट नहीं होता है
तब जब वेदों पर
टीका की थी कभी उपनिषदों ने
तब जब ब्राह्मण चाणक्य
सत्ता से भिड़ा जनपदों में
तब जब चरक मुनि ने
शूद्र वर्ण अपनाया
तब जब शंकर ने कभी
अद्वैत मार्ग दिखलाया
ये सब तब बाईं तरफ झुके थे
तुम देखो ये कौन थे
ये राइट थे या लेफ्ट थे
विश्वामित्र ने तब जब
ब्राह्मण बनने की ठानी
रैदास ने धर्म का मार्ग चुना
तो किसी ने दी गुरुबानी
और गांधी जो राम नाम रटते थे
और नरेंद्र जो हिन्दू हूँ
गर्व से कहते थे
और अकबर जिसने
दिया दीन का नारा
और दयानंद जिन्होंने
प्रस्तर पूजन से किया किनारा
और जो एक ख़िलाफ़त की खातिर
सब निकले सड़कों पर
तब हां
तब भी वो कुछ राइट की ओर मुड़े थे
अब तुम देखो
वो राइट थे या लेफ्ट थे
वो बुद्ध थे
जो थोड़ा लेफ्ट मुड़े
और मध्यम मार्ग को खोजा
वो मुहम्मद थे
जो थोड़ा राइट मुड़े
और नए विचार को जोड़ा
वो एकलव्य था जो राइट मुड़ा
पर दक्षिण की दीवारों को तोड़ा
वो शून्य, दशमलव, गणित, ज्योतिष
सबकुछ दक्षिण मार्ग से आये
वो कबीर , मीरा, रहीम, नानक, रसखान
क्यों भक्ति काल के कहलाए
ये सब अपने अपने मार्ग गए थे
अब तुम देखो ये राइट थे या लेफ्ट थे... –
रवि मिश्रा( 26.9.2017)