दिल की बात सुनो
जब राह नहीं सूझे
जब पांव कहीं पे रूकना चाहें
मन यादों से ने छूटना चाहे
औरों को जो लगे अंधेरा
और तुम ढ़ूढ़ों उसी जगह
बीता हुआ वही सवेरा
रूक जाऊं या क़दम बढ़ाऊ
खुद के लिए जीऊं
या फिर दुनियां के नियमों के लिए
सांस लूं और मर जांऊ
ये जाल न जब टूटे
दिल की बात सुनो
जब राह नहीं सूझे
जो छोड़ गये राहों में
सूखी , अकेली ,काटती
इन रास्तों की बाहों में
मिलते है फिर भी लोग
कोई हथेली अपनी नहीं क्यों मिलती
के फिर से थाम थोड़ा और जी जाऊं
मन जो ये उलझन न बूझे
दिल की बात सुनो
जब राह नहीं सूझे
दिल का कोई कोना ख़ाली क्यों है
और उसे नहीं भरने की ज़िद भी
कोई और क्यों उस कमरे में जाये
कोई नई ताज़ी हवा न आये
सो खिड़कियां दरवाज़े सब
बंद किये हैं सालों से
और उसमें दिवारों को सजाया है
जवाब न मिलने वाले सवालों से
फिर जब कुछ सवाल जवाबों के लिए चीख़े
दिल की बात सुनों
जब राह नहीं सूझे
जब राह नहीं सूझे
जब पांव कहीं पे रूकना चाहें
मन यादों से ने छूटना चाहे
औरों को जो लगे अंधेरा
और तुम ढ़ूढ़ों उसी जगह
बीता हुआ वही सवेरा
रूक जाऊं या क़दम बढ़ाऊ
खुद के लिए जीऊं
या फिर दुनियां के नियमों के लिए
सांस लूं और मर जांऊ
ये जाल न जब टूटे
दिल की बात सुनो
जब राह नहीं सूझे
जो छोड़ गये राहों में
सूखी , अकेली ,काटती
इन रास्तों की बाहों में
मिलते है फिर भी लोग
कोई हथेली अपनी नहीं क्यों मिलती
के फिर से थाम थोड़ा और जी जाऊं
मन जो ये उलझन न बूझे
दिल की बात सुनो
जब राह नहीं सूझे
दिल का कोई कोना ख़ाली क्यों है
और उसे नहीं भरने की ज़िद भी
कोई और क्यों उस कमरे में जाये
कोई नई ताज़ी हवा न आये
सो खिड़कियां दरवाज़े सब
बंद किये हैं सालों से
और उसमें दिवारों को सजाया है
जवाब न मिलने वाले सवालों से
फिर जब कुछ सवाल जवाबों के लिए चीख़े
दिल की बात सुनों
जब राह नहीं सूझे