अब जब सीने में यहां
मैं ज़हर भरता हूँ
आहिस्ता हर रोज़ यहां
मैं कमबख्त मरता हूँ
अपने हाथों से
लगाये थे जिनको कभी
गांव में छूटे वो सारे
मैं दरख़्त याद करता हूँ.
मैं ज़हर भरता हूँ
आहिस्ता हर रोज़ यहां
मैं कमबख्त मरता हूँ
अपने हाथों से
लगाये थे जिनको कभी
गांव में छूटे वो सारे
मैं दरख़्त याद करता हूँ.
No comments:
Post a Comment