अधूरे से पूरे....
रवि की कलम से
Saturday, November 30, 2019
वोटर किसान
हल वाले हाथों के
पेट का सवाल था
शोर था बवाल था
भारी भीड़ थी
और भीड़ में...
कुछ सिर्फ किसान थे
कुछ किसान नेता थे
कुछ सिर्फ नेता थे
नेता मंच पर थे
किसान नेता उनके पीछे थे
और किसान
किसान सबसे नीचे थे
Saturday, November 9, 2019
गांव के दरख़्त
अब जब सीने में यहां
मैं ज़हर भरता हूँ
आहिस्ता हर रोज़ यहां
मैं कमबख्त मरता हूँ
अपने हाथों से
लगाये थे जिनको कभी
गांव में छूटे वो सारे
मैं दरख़्त याद करता हूँ.
सत्य का मौन
जो चीख़ रहा वो सत्य नहीं..
जो मौन यहां वह झूठ है.
फलदार वृक्ष विषयुक्त है..
अमृत शाखा यहां ठूंठ है.
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