है वतन अपना तो सबकुछ
सबकुछ है तुझपर ही निसार
सौ बार जन्मू इसी धरा पर
सौ बार मिले मां तेरा ही प्यार
है कफ़न मेरा मुकद्दर
तेरी खुशी के वास्ते
हमने चुने थे ऐ वतन
तेरे लिए ये रास्ते
मर के भी जिन्दा हैं हम
हर साँस में वतन के
फूल नहीं फौलाद थे
रक्षक थे इस चमन के
कुछ याद आए ना सही
नस्लों ये याद रखना
कोई भी हो कुर्बानी मगर
ये मुल्क आबाद रखना