भोर भईल अब जाग साथी
रात अन्हरिया भागल साथी
पहिला किरण से जग उजियारा
दूर कहीं छुप गएल अंधियारा
घोर निरासा भागल साथी
आस के लाली छा गएल साथी
भोर भईल अब....
लेके के हरि के नाम तू जाग
जीवन के ताल पर तू हो भाग
एगो नया दिन आ गएल साथी
जीवन दर्शन बुझा गएल साथी
भोर भईल अब....
रात के बाद उजाला ही होला
जग के गति कभो कहंवा रुकेला
कर्म में अपना लाग हो साथी
इहे धरम बा जान हो साथी
भोर भईल अब....
सुख जइसे अंतिम सच ना ह
दुख भी ओइसे ही अमर कहां ह
चक्र चलेला हर दम हो साथी
करत जा आपन करम हो साथी
भोर भईल अब....