ए नादान पंछी
लौट आव तू..लौट आव तू...लौट
आव तू
काहे दर दर भटके
काहे रुके कहीं ना
कबतक दूर घर से
भटके मन बन पंथी
लौट आव तू...लौट आव तू
...लौट आव तू..
ए नादान पंछी
लौट आव तू..लौट आव तू...लौट
आव तू
पाख के जोर बा जेतना ओतना
आसमान तोहरा मिल त जाई
पर माटी के बंधन कईसे
कईसे कोई बिसराई
ए नादान पंछी ..ए नादान
पंछी
तोहरा बिन बा सबकुछ सूना
जईस मोह के रंथी
ए नादान पंछी
लौट आव तू...लौट आव तू
...लौट आव तू..
पेट के आग समान होएला
रोटी में ना कोई भेद होला
पर माई के हाथ के कवर
मुहं से कहां छूटे पाएला
ए नादान पंछी ..ए नादान
पंछी
माई के थरिया से भोग लगा ल
आस के अंगना में बन जा बंसी
ए नादान पंछी
लौट आव तू...लौट आव तू
...लौट आव तू..