ये शहर मेरे आंसूओं से बह जाता क्यों नहीं
चीखती आहों का कुछ असर आता क्यों नहीं.
चीखती आहों का कुछ असर आता क्यों नहीं.
कपड़ों से नहीं
नजरों से बचाओं मुझको
मेरे चारों तरफ का ये अंधेरा
इससे दूर कहीं ले जाओ मुझको
नजरों से बचाओं मुझको
मेरे चारों तरफ का ये अंधेरा
इससे दूर कहीं ले जाओ मुझको
जिस्म की बोटियां
रूह का लहू
आंखों का मोम
जख्मों से भरा मेरा रोम रोम
रूह का लहू
आंखों का मोम
जख्मों से भरा मेरा रोम रोम
कितने सबूत
कितनी कुर्बानियां दूं और
अब ना हुआ तो कब
कितनी कुर्बानियां दूं और
अब ना हुआ तो कब
अपनी बेटियों पर ये रहम खाता क्यूं नहीं
ये शहर मेरे आंसूओं में बह जाता क्यूं नहीं.
ये शहर मेरे आंसूओं में बह जाता क्यूं नहीं.
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