कुछ है जो साथ चला आया है अबतक
वरना पत्थर सी कहानी में
कुछ मोम सा क्यूं रहता
रहता भी तो पिघलता नहीं
और न महसूस होता जबतब
काठ पर घिस घिस के अब
लकीरें सपाट हो चलीं
तुमको शौक था परखने का खुदा
चलो अब तो कह दो
किसी अंजाम पे पहोचोगे कबतक..
- रवि मिश्रा
वरना पत्थर सी कहानी में
कुछ मोम सा क्यूं रहता
रहता भी तो पिघलता नहीं
और न महसूस होता जबतब
काठ पर घिस घिस के अब
लकीरें सपाट हो चलीं
तुमको शौक था परखने का खुदा
चलो अब तो कह दो
किसी अंजाम पे पहोचोगे कबतक..
- रवि मिश्रा