अबकी फगुनवा में अईह तू
बिदेसिया
होलिया ना रहे रे उदास
बरस-बरस कोरा रही गइल
अंगना
कब ले करीं हम आस
चउखट सूना रहे सूना रहे
घरवा
अंखवा रहेला उदास
जाने कौन बेरा होई सुनहे
हो राम जी
बानी हम अंचरा पसार
अबकी फगुनवा में अईह तू
बिदेसिया..
कोनो रंग चढ़े नाही, मन में जीवन में
कोनो गीत सरगम न ताल
जोने कब फगुआ सुनाई हमरो
दुअरा
जाने कब बाजी कौनों झाल
अबकी फगुनवा में अईह तू
बिदेसिया...
बरस भईल अब काटे ला दलनवा
तहरा के खोजे दिन रात
अबकी न अईब त जाने कब अईब
केकरा से कहीं मन के बात
अबकी फगुनवा में अईह तू
बिदेसिया...
काहे कईल नोकरी बन
परदेसिया
माई माटी दूनो से तू दूर
जाने कब सुनब तू इनके
अरजिया
कब ले इ मन मजबूर
अबकी फगुनवा में अईह तू
बिदेसिया
होलिया ना रहे रे उदास
बरस-बरस कोरा रही गइल
अंगना
कब ले करीं हम आस
- रवि मिश्रा (
01.12.2014)