एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
जो जन के जीवन से जुड़ा हो
जो वचनों से नहीं कर्म से पूरा हो
वो जो राष्ट्र के उत्थान की सोचे
वो जो बेघर के मकान की सोचे
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो...
ऐसा जो मुकरे नहीं वादों से
ऐसा जो अटल हो अपने हो इरादों से
जो करे बात हमारी तुम्हारी
जिसे ने लगे भ्रष्टाचार की बीमारी
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो...
जो जुड़ा हो सच के जहान से
जिसकी सोच मिलती हो तरक्की के आसमान से
जिसके हाथ हर मजलूम के लिए सहारा हों
जो हर डूबती उम्मीद का किनारा हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो......
वो जो बदले तस्वीर समाज की
वो जो बने प्रतिछाया जनता के राज की
जो साहस में हिमालय हो
जिसका हृदय करूणा का देवालय हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
जिसके पदचिन्हों पर चलने को उबले युवा रक्त
जिसके एक एक वचन का हर मन हो आसक्त
कर्म से श्रेष्ठ जिसके लिए कोई धर्म न हो
जन सेवा से पृथक जीवन का कोई मर्म न हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
- रवि मिश्रा ( 06.12.2013)
जो जन के जीवन से जुड़ा हो
वो जो राष्ट्र के उत्थान की सोचे
ऐसा जो अटल हो अपने हो इरादों से
जो करे बात हमारी तुम्हारी
जिसे ने लगे भ्रष्टाचार की बीमारी
जो जुड़ा हो सच के जहान से
जिसकी सोच मिलती हो तरक्की के आसमान से
जिसके हाथ हर मजलूम के लिए सहारा हों
जो हर डूबती उम्मीद का किनारा हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो......
वो जो बदले तस्वीर समाज की
वो जो बने प्रतिछाया जनता के राज की
जो साहस में हिमालय हो
जिसका हृदय करूणा का देवालय हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
जिसके पदचिन्हों पर चलने को उबले युवा रक्त
जिसके एक एक वचन का हर मन हो आसक्त
कर्म से श्रेष्ठ जिसके लिए कोई धर्म न हो
जन सेवा से पृथक जीवन का कोई मर्म न हो
एक जनप्रतिनिधी ऐसा हो
- रवि मिश्रा ( 06.12.2013)