Monday, July 1, 2013

हिमायल तू पत्थर है




हे हिमायल !
सच है, तू पत्थर है

तेरे देश में सबकुछ तो होता है
पर तू न हिलता है , न रोता है
न हर्ष, न क्रंदन
अविचलित, न स्पंदन

जो टूटा नहीं तो बरसों बरस
टूटा तो दुखों के पहाड़ सा इस बरस

देव, दानव और मानव
कहां किसी पे दया की  तूने
शवों का अंबार
मृत पाषाण, शुष्क प्रस्तर है

हे हिमायल !
सच है तू पत्थर है

दया, याचना, रूदन
सबकुछ किया  होगा
पर तेरे श्रवण पिंडो से टकराकर
सबकुछ खाली लौटा होगा

सत्य है तेरी शैल त्वचा को छील रहा है मानव
मंद मंद तेरी ही संपदा लील रहा है मानव

किंतु क्षणभर को सोचा तो होता
हे विशाल ! पलभर रोका तो होता
दंड ये तेरा कैसा ?
कैसा कठोर ये उत्तर है

हे हिमायल !
सच है तू पत्थर है
                          - रवि मिश्रा 02.07.2013